आएश भी हो चुके हैं ,अब छह साल के रखने लगे हैं अपनी किताबें संभाल के : दादा

आएश के दादा यानी हाजी सैयद मोहम्मद मुस्लिम कभी खूब शायरी किया करते थे.लेकिन समय ने उनसे यह छीन लिया.अब कभी-कभार !!
आएश इस चार अगस्त को छह साल के हो गए.लेकिन दादा उन से दूर हैं.हाँ उनकी अम्मा उनके पास हैं तो ज़रूर लेकिन अशक्त हैं.
उनके दादा ने कुछ पंक्तियाँ लिखी थीं जब आएश ने अपना चौथा जन्मदिवस मनाया
मेरे अज़ीज़ मेरे चहिते और खुश खिसाल
शुक्रे खुदा की तुम ने गुज़ारे हैं चार साल
उम्रे-खिज़र हो, खस्लत-ए-हज़रत अली की हो
पढने में तुम रहो दुनिया में बेमिसाल
[अज़ीज़ यानी प्रिय, खुस-खिसाल मतलब अच्छी आदत व्यवहार वाले ,खिज़र एक पैगम्बर हुए जिन्होंने लम्बी आयु पायी थी.हज़रत अली खलीफा हुए.जिनकी ईमानदारी और बहादुरी के क़िस्से मशहूर हैं.]













August 7, 2010 7:11 AM
ज़िंदगी का सातवाँ साल मुबारक़ हो!
August 7, 2010 7:53 AM
बहुत खूब.. दादी के सेवा करत्र देख कर बहुत अच्छा लगा..
August 7, 2010 9:30 AM
TUM JIYO HAZARON SAAL HAI YAHI AARZOOOOOOOO !!!!!!1
August 8, 2010 8:26 PM
शुभकामनाएँ...
August 9, 2010 4:56 AM
ढेर सारी बधाइयाँ....
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'पाखी की दुनिया' में आपका स्वागत है.
August 9, 2010 5:43 AM
शुभकामनाये
August 9, 2010 6:56 AM
ढेर सारी बधाइयाँ....
August 10, 2010 1:28 AM
مبارکباد ، آپکی خدمات میں
August 16, 2010 11:24 PM
how sweet :)
August 18, 2010 2:29 AM
आयश ...जल्दी से और भी बड़े हो जाओ और खूब मस्ती करो..प्यार.
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आप सबका 'बाल-दुनिया' में स्वागत है.
September 5, 2010 4:00 AM
आयश का ब्लॉग pasand aaya bahot khub
September 9, 2010 6:41 AM
मेरे अज़ीज़ मेरे चहिते और खुश खिसाल
शुक्रे खुदा की तुम ने गुज़ारे हैं चार साल
उम्रे-खिज़र हो, खस्लत-ए-हज़रत अली की हो
पढने में तुम रहो दुनिया में बेमिसाल
बहुत खूब