हम बहुधा बच्चों को कोई नया काम करते देख कर हडबड़ा जाते हैं. घड़ी छू रहा है, कहीं तोड़ न डाले. बच्चे ने क़लम हाथ में लिया और हाँ...हाँ..हाँ..का शोर मचा!ऐसा नहीं होना चाहिए.बालकों की स्वाभाविक रचनाशीलता को जगाना चाहिए. बालक खिलौने बनाना चाहे या बेतार का यंत्र ; चाहे नाटकों में अभिनय करना चाहे या कविता लिखना चाहे, लिखने दो....माता-पिता की यह कोशिश होनी चाहिए कि उनके बच्चे उन्हें पतथर की मूर्ति या पहेली न समझें.हमें बच्चों को इस योग्य बनाना चाहिए कि वह खुद अपने मार्ग का निश्चय कर लें.छोटा बच्चा भी, अगर उसे सीधे रास्ते पर लगाया जाय, तो वह अपनी ज़िम्मेदारी को समझने लगता है.बच्चे को सही शिक्षा देना इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि उसके जीवन का उद्देश्य कार्यक्षेत्र में आना है.:प्रेमचंद



दादी माँ की कहानियाँ

बचपन में हमने भी खूब सुनीं ऐसी कहानियां।कभी दादी से तो कभी नानी से.आप भी ज़रूर सुनते होंगे बच्चो! घर पर अगर आपके कोई न हो तो क्यों न आप इस तरह इन कहानियों का मज़ा लें.लीजिये मैं ने आपके लिए लाया है दादी माँ के खजाने से ढेरों कहानियां जो आपको न केवल हंसाएंगी रुलायेंगी बल्कि ढेरों सीख और शिक्षा भी देंगी.जैसे हमें क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए.

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7 Response to "दादी माँ की कहानियाँ"

  1. Pragya says:
    March 25, 2010 at 9:28 AM

    wah ekdum nai tarah ka blog hai.... i am very happy ki meri beti ko ab mujhe idhar udhar se dhundh dhundh kar kahaniyan nahi sunani padengi...
    bahut achha prayas hai aapka hamare bachhon ko nai tchnology ke madhyam se apni sanskriti aur updesh se bhari hui kahani sunane ka....
    bahut bahut badhai...

  2. सतीश सक्सेना says:
    April 9, 2010 at 10:51 PM

    यह प्रयोग और भी अच्छा रहा ! बच्चे बहुत पसंद करेंगे

  3. shubham sachdev says:
    April 15, 2010 at 3:54 AM

    अरे वाह आएश , आमेश तुम्हारी मम्मी तो बहुत अच्छी-२ वीडियो दिखाती है । मैनें भी कहानियां लिखी हैं , पढने जरूर आना ..shubham sachdev

    http://www.shubhamsachdeva.blogspot.com/

  4. रावेंद्रकुमार रवि says:
    April 16, 2010 at 6:37 PM

    चर्चा मंच पर
    महक उठा मन
    शीर्षक के अंतर्गत
    इस ब्लॉग की चर्चा की गई है!

    --
    संपादक : सरस पायस

  5. माधव says:
    April 17, 2010 at 4:35 AM

    पहली बार यहाँ आया हूँ , अच्छा लगा

  6. माधव says:
    April 17, 2010 at 5:30 AM

    अच्छी ज्ञान मिली

  7. अपनीवाणी says:
    August 6, 2010 at 5:51 AM

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    धनयवाद ...

मंज़िल के चिराग़